लामा बियर आर्गेनिक एक्सटैक्ट लिमिटेड

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लामा बियर आर्गेनिक एक्सटैक्ट लिमिटेड

आपको निमंत्रित करती हैं कि आप प्रकृति के अनमोल समृध्दि के धारक बनें।

एक नई सुबह को जब आप अपनी पहली चाय पीते हैं, अपना भोजन बनाने के लिए आप जिस तेल का उपयोग करते हैं, अपने स्वास्थ को अच्छा बनाए रखने के लिए आप जिन चमत्कारी औषधियों को प्रयोग में लाते हैं और अपनी त्वचा को कोमल बनाए रखने के लिए आप जिन अद्भुत वनस्पति तत्वों का इस्तेमाल करते हैं, हरित तकनीकि से सर्वोतम् द्व्य सार निष्कर्षण प्रकिया से जल्दी ही ये सारी वस्तुएं आपको उपलब्ध कराई जाएगीं क्योंकि लामा बियर ने इस दिशा में एक सार्थक कदम बढाया हैं।

योजना

SFC  के वानस्पतिक सक्रियता का उपयोग करके खाद्य पदार्थ और पेय साम्रगी उपलब्ध कराना, स्वास्थ और पोषण, स्वयं के शरीर के देखभाल से जुडे स्वास्थ उद्योग के उत्पादन और अधुनातम (नवीनतम) निर्यात केद्रित समन्वित सुविधा उपलब्ध कराने के क्रम में लामा बियर का यह एक प्रयास हैं। सर्वोतम द्रव्य सार निष्कर्षण से उत्तम खाद्यान्न के सार- तत्व को निकालने के लिए उचित तापमान पर जैविय सन्तुलित पदार्थ के वानस्पतिक गुणों का संरक्षण किया जाता हैं। हाइर्डो इथानाँल मिश्रण की सहायता से विष मुक्त (कीट नाशक रहित) उत्तम खाद्यान्न का उत्पादन जिस में चुबम्कीय यौगिक से मिश्रण से खाद्यान्न को विष मुक्त और उत्तम श्रेणी का बनाने के लिए इथेनाल प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। क्रायोजेनिक पद्धति से शून्य से कम तापमान पर ( -196 से -79 सेल्सियस) अपरिपक्व अन्न को पुष्ट किया जाएगा। नैनो पार्टिकल कणों के संश्लेषण की प्रकिया से इस नवीन तकनीकि से औषधि प्रबंधन के क्षेत्र में नए अन्वेषण सुविचारित हैं। उच्च स्तरीय तकनीकि से लैस मूलभूत सुविधाओं से सम्पन्न एक प्रयोगशाला जो उपभोक्ता हेतु लाभकारी एक अनूठी वानस्पतिक सक्रियता की रचना और अन्वेषण करने में पूर्ण रूप से सक्षम होगें।

तकनीकि के सम्बन्ध में

विकसित देशों की विकसित तकनीकि का हिस्सा सुपर क्रिटिकल फ्लूड एक्सटैक्सन बहुत तेजी से वानस्पतिक गुणों से युक्त घोलक द्रव्यों को निकालने के पारम्परिक तरीकों की जगह लेता जा रहा हैं। जिससे की प्राकृतिक उत्पाद उद्योगों में इस तकनीकि का उपयोग किया जा सके। इस नए समय में उपभोक्ता खाद्य पदाथों में उपयोग होने वाले रसायनो के प्रति जागरूक है तथा उद्योगों पर दबाव है कि उन्हें रसायन विमुक्त साम्रगी प्रदान करे जो कि हरित तकनीक से दी जा सकती हैं। SFE  तकनीक अन्य सभी तकनीकों से बेहतर है क्योकि इससे शुध्द सार तत्व प्राप्त होता है एवं यह पर्यावरण के लिए सुरक्षित भी है। यह प्राकृतिक तत्वों से भरपूर ,रासायनिक कचरों से मुक्त, पैथोजन और हानिकारक धातुओं से रहित और लम्बे समय तक सुरक्षित सार तत्व को निकालता हैं।

SFE  की विशेषताओं को सदियों पहले पहचाना जा चुका था किन्तु पिछले तीन दशकों में विकास की तेज व्यवसायिकरण गति और तेजी से होते व्यवसायिकरण के कारण प्राकृतिक उत्पाद उद्योग के इस तकनीक को सर्वाधिक मान्यता प्राप्त हुई है। चाय और काफी से हानिकारक कैफिन को निकालकर चाय और काफी को स्वास्थय के लिए ज्यादा लाभदायक बनाना आजकल प्रचलन में हैं।

ये सभी उत्पाद इस उद्योग से प्राप्त होते है –

  • विभिन्न प्रकार के तेल
  • विभिन्न सुगन्धित पदार्थ
  • विभिन्न मसाले एवं उनके अवयव

ये सभी पदार्थ निर्माण से पहले ही SFE  तकनीक से पूरी तरह से कीटनाशक से मुक्त होगें। उत्पाद के पूरी तरह तैयार होने तक की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विकसित देशों के कडी सुरक्षा नियमों के अनुसार आर्गेनिक घोलक जैसे हेक्सेन का प्रयोग किया जाता है जिससे की कम से कम कचरा और दूषित पदार्थ निकले। स्वास्थ और पर्यावरण के मुद्दों के कारण सभी FMCG के उद्योगों पर ये दबाव है कि वह जो भी तत्व उपयोग करें वो पूर्णतया कीटनाशक रहित हो, SFE तकनीक से और रासायनिक तकनीकि व रासायनिक घोलकों से वानस्पतिक तत्वो को निकालने की प्रकिया अब लगभग समाप्त हो चुकी है।

भविष्य अब SFE तकनीकि का है। अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देश SFE तकनीक को पहले ही अपना चुके है । इसी उन्नत होते बाजार व इस सुनहरे अवसर को देखते हुए लामा बियर ने इस दिशा में कदम बढाया है। SFE तकनीकि में मंहगे पूजी निवेश के बावजूद, उच्च दाब वाले उपकरणों के आवश्कता के कारण, सस्ते घोलकों के उपयोग के कारण और सफाई और सुरक्षा के आसान तरीकों के परिणाम स्वरूप ये कम खर्चीली तकनीक है। शुरूआती दौर में यह तकनीकि अधिक निवेश और कम उत्पादन वाले उद्योग के रूप में जाना जाता था परन्तु बदलते समय के साथ यह कम निवेश और ज्यादा उत्पादन के साथ विश्व बाजार को आकर्षित कर रहा है।

हरित SFE तकनीकि के लाभ

सुपर क्रिटिकल फ्लूड को उपयोग में लाने के कुछ विशेष कारण हैं जैसे अधिकतम रूप में शुध्द उत्पादों की प्राप्ति, दूषित घोलकों की नामौजूदगी एक ही चरण में पूरी प्रकिया का पूरा होना, दूषित घोलकों की नामौजूदगी, एक ही चरण में पूरी प्रक्रिया का पूरा होना, कम धनराशि में प्रक्रिया का होना, मिश्रणों के अंश का सही चुनाव,  पर्यावरण- सम्मत होना और जंतु व वनस्पति विज्ञान के नियमों के अनुकूल होना, इसके अलावा प्राप्त तत्वों का पूरी तरह से कीटाणु रहित होना प्रक्रिया के सर्वोत्तम लाभ हैं।

एक सुनहरा उद्योग

औषधिय शास्त्र के अनुसार जडी- बूटियों में पाए जाने वाले वास्पतिक तत्व के सार्थक प्रयोग का यह एक नवीनतम और अद्भुत तकनीकि है । खाद्य पदार्थों के निर्माण के क्षेत्र में तकनीक का प्रयोग के एक अनोखा प्रयोग है। सुपर क्रिटिकल के प्रयोग के माध्यम से खाद्यान कन्फेक्शरी पास्ता, विभिन्न प्रकार  के फ्लेवर रसायन औषधि और स्नैक्स में निहित अखाद्य तत्वों को पूरी तरह से निकलना, उपयोग में लाए जाने वाले तेल जैसे पाम, सोयाबीन और सुरजमुखी के तेल में से अतिरिक्त हैक्सेन को निकालना जो कि पुराने परम्परागत द्रव्य घोलकों की सहायता से नहीं निकाले जा सकता थे। एक पूरे अंडे को, मछली को तथा अन्य जानवरों के उत्तक या टिशू को जो सम्रग रूप से रसायनों से युक्त होते हैं उन्हे रसायन मुक्त करना। उदाहरण के तौर पे तकनीक से निर्मित रोजमेरी एक्सटऐक्ट ने एक प्राकृतिक एन्टीआक्सीडेन्ट के रूप में हमे एक सशक्त बाजार और उत्पाद के बढते मांग का लाभ दिलाया हैं। उपभोक्ताओं को इस तकनीक की उपयुक्त जानकारी देने पर प्राकृतिक फ्लेवर और मसालों के क्षेत्र में भी बाजार के बढते मांग को भुनाया जा सकता है।

लामा बियर की विशेषताएं

जबकि भारत पूरी दुनिया में पारम्परिक तकनीकि से बने प्राकृतिक तत्वों का निर्यात करने वाला सबसे  बडा देश है परन्तु वर्तमान विश्व बाजार में इन उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दिया गया है। कारण है –

घोलकों में निहित अवांछित कचरा, पैथोजन और अन्य अशुध्दता।विदेशी कम्पनियाँ

आज भी भारत और अन्य देशों से कच्चा माल मंगवाते हैं और उत्पाद का निर्माण स्वंय करते है। तकनीकि के साथ अर्न्तराष्टीय मानकों को ध्यान में रखते हुए असंख्य जडी-बूटियों और मसालों को लेकर लामा बियर इस अछुते क्षेत्र में एक सशक्त स्थान बनाने के लिए कटिबध्द है। 2010 में ASSOCHAM से किए गए एक रिसर्च के रिर्पोट के अनुसार भारत में 30 प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली जडी बुटियों की पूर्ति कैमूर पर्वत की घाटियों और विंध्य तथा नीलगिरी पर्वत श्रेणियों के कुछ हिस्सों से की जाती है। इसी व्यापार से सम्बध्द अन्य लोगों की तुलना में लामा बियर का काम बिल्कुल अलग और अनुपम होगा हम इन विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों के फसल को उगाने का काम उपजाऊ और सिंचाई की सुविधा से युक्त 500 एकड जमीन पे उपजाने का काम करेगें।

मुक्त रूप से तीन मूलभूत बातें हैं।

1)      SFE जैसी नवीनतम तकनीकि का इस्तेमाल

2)      कच्चे माल के असीमित स्त्रोत का होना

3)      सबसे महत्वपूर्ण बात उत्पादों के बिक्री के लिए एक बाजार का होना

हमलोगों का लक्ष्य है कि इस तकनीकि से उत्तम उत्पादों का निर्माण करें और परम्परागत रूप से तैयार बाजार में उपलब्ध रासायनिक उत्पादों से  वर्तमान बाजार को मुक्त कराएं।

योजना प्रबंधन

ऐसी योजनाओं को परामर्श देने वाली देश की एक पेशेवर कम्पनी इनफ्रास्टक्चर लीजिंग एण्ड फाइनेंस सर्विस लिमिटेड से इस योजना को तैयार और मूल्यांकित किया गया है। एक कानून सम्मत योजना प्रबंधन संस्था भी है, जो इस योजना में बिहार सरकार की ओर से काम कर रही है। इस खाद्यान्न निर्माण योजना के एकीकृत विकास के लिए बिहार सरकार ने अनुदान दिया है। इस योजना में सहयोग देने के लिए हमारे साथ कुछ ऐसे लोगों का समूह काम कर रहा हो जो उद्योग से जुडे पेशेवर अनुभवी अत्यन्त प्रेरणादायक, उत्साही, वानस्पतिक तथ्यों और तत्वों के जानकार विशेषज्ञ है तथा लगभग दो दशकों से व्यापार और बाजार से जुडे हुए हैं। यह एक ऐसा समूह है- जिसमें वैज्ञानिक, तकनीकि विशेषज्ञ, लेखाधिकारी, विद्वान, किसान,बिक्रि कर्ता और कानूनी विशेषज्ञ सभी क्षेत्रों के लोग जुडे है।

हमारा व्यापारिक दृष्टिकोण (नजरिया)

SFE के वानस्पतिक पदार्थों को लेकर लामा बियर एक ऐसे विश्व बाजार के साथ व्यापार करने के लिए प्रयत्नशील है जो शत प्रतिशत निर्यात  केन्द्रित ईकाई के रूप में काम करेगी, जिसमें अमेरिका और यूरोप जैसे देश शामिल होंगें। जापान के एक मल्टीनेशनल फर्म के साथ इस कम्पनी की एक पूरी व्यापारिक व्यवस्था निश्चित हो चुकी है जो कम्पनी के शत-प्रतिशत उत्पादन क्षमता का क्रय विक्रय करेगी। ASSOCHAM  के रिसर्च से यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि विश्व बाजार में आर्थिक मन्दी के बावजूद नैचुरल एक्स़टैक्ट का बाजार दिन दुगुना रात चौगुना बढ रहा है। अप्रैल 2010 के ASSOCHAM  के एक रिर्पोट के अनुसार अनुमानत भारत का वर्तमान बाजार 7500 करोड़ रूपए यानि 75 बिलियन रूपये का है जो चक्रवृध्दि वार्षिक उन्नति के दर से लगभग 20 प्रतिशत बढता जा रहा है। अनुमान है कि 2015 तक यह बाजार 15000 रूपए करोड़ यानि 15 बिलियन रूपए तक पहुच़ जाएगा ।
इस क्षेत्र में भारत के समृध स्त्रोत को ध्यान में रखते हुए वर्तमान हिस्सेदारी को बहुत कम आंका जा सकता है । यदि सम्भावनाओं को सही रूप में आंका जाए तो जो तथ्य उजागर होता है उसके अनुसार भारत 300 बिलियन रूपए  का कच्चा माल उत्पन्न कर सकता है जिससे कि रूपया 150 बिलियन के कीमत के उत्पादों  का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। रिर्पोट में आगे कहा गया है कि नैचुरल एक्सटैक्ट के निर्यात में भारत पहले ही एक वर्ष में US डालर 100 मिलियन मूल्य के लक्ष्य  तक पहुचँ चुका है। जिसमें की 60 प्रतिशत कच्चा माल है ( भारत के बाहर अन्य देशों में जिसे उत्पादों के निर्माण के काम में लाया जाता है।) लगभग 30 प्रतिशत तैयार उत्पाद बाहर भेज दिया जाता है और बचा हुआ 10 प्रतिशत तैयार उत्पाद विदेश के विभिन्न देशों में भेज दिया जाता है इस तरह भारत इन समृध्द सम्भावना का मुश्किल से 50 ही उपयोग कर पाता है मजे की बात यह है कि कच्चा माल और तैयार माल दोनों का ही एक तैयार विश्व बाजार है।
लामा बियर सभी को एक समान अवसर प्रदान करने वाली संस्था से जुड़े हर एक सदस्य के साथ व्यापार में पारदर्शिता रखती है। और उन्हें समुचित प्रतिफल प्रदान करती है तथा शुरू से लेकर अन्त तक एकीकृत रूप से होने वाली हर वृध्दि की जानकारी में उन्हें शामिल करती है। वर्तमान में रखी आधार शिला ही भविष्य को आकार देती है। लामा बियर इस सुनिश्चित समृध्दि की धारा में अपने साथ तैरने का आनन्द उठाने के लिए और सफलता की एक नई कहानी लिखने को लिए आपको एक यादगार और अनुपम अवसर प्रदान करता हैं।